Latest Posts

Tuesday, November 13, 2012


Saturday, October 13, 2012

Resistration on www.intraharyana.nic.in

How to get Registered on Www.intraharyana.nic.in
1 open the above mention Website
2.click on New Registration.
3 Screen will display 4 options to be filled by you
A-employee type -choose others
B-Date of Birth-click small coloured box placed after DOB blank space.
C-date of Joining -fill it in the same manner (1/1/2000)not 1-1-2000
D-Salary Account Number
E-security code -mentioned just in front of option
D-click on submit.
After this enter Email to getUr User id n password .Ur Id n password will be sent on your Number soon

Marking ke liye on-line resistration 13 Oct. 10am se

IMPORTANT
For best view of application use Google chrome/Mozila Firefox browser.
For Retired Personnel :    
1.      On the day of registration , age should not exceed 65 years .
2.       Before submission , scan your  photograph in Jpg/jpeg format and size should not exceed 20KB .
3.       After  successful submission of details, take print out and send to the Board along with a copy of retirement / pension proof .
4.      Information once furnished can be edited before sending  the print out to the Board. For editing Login with the user ID and Password. Edit the information and re-submit.
For In-service Personnel:
1.      Select your district. List of all schools will be displayed .
2.      Select your School and fill up the proforma.
3.      Before submission scan your photograph in Jpg/Jpeg format and size should not exceed 20KB.
4.    After Successful submission of details take print out and send to the Board duly countersigned by Head of your School.
5.      Information once furnished can be edited before sending  the print out to the Board. For editing Login with the user ID and Password. Edit the information and re-submit.
   

 

Friday, October 5, 2012

JBT teachers New 3 Tier rules ka Virodh

रैशनेलाईजेशन नीति के विरोध में प्राथमिक शिक्षक संघ

चण्डीगढ़: शिक्षा विभाग में शिक्षकों की रैशनेलाईजेशन की प्रक्रिया को लेकर अपनाई जा रही नीति का विरोध बढ़ता ही जा रहा है। विभाग द्वारा कक्षा 1 से 5 तक के शिक्षकों का इस वर्ष दूसरी बार रैशनेलाईजेशन किया जा रहा है। विभाग की रैशनेलाईजेशन नीति को आरटीई के नियमों के विपरीत बताते हुए प्राथमिक शिक्षक संघ ने इसके विरोध में आवाज बुलंद कर दी है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष विनोद ठाकरान ने विभाग व सरकार के रैशनेलाईजेशन की नीति की कड़ी आलोचना करते हुए इसे नियम विरूद्ध बताया है और आशंका जताई है कि इससे शिक्षकों के हजारों पद सरप्लस हो जाएंगे। प्रदेश महासचिव दीपक गोस्वामी ने बताया कि विभाग ने रैशनेलाईजेशन के नाम पर प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के हजारों पदों को सरप्लस करने की योजना पर काम शुरू किया हुआ है। विभाग आरटीई के प्रावधानों को ठेंगा दिखाकर मनमानी करने पर आतुर है। क्योंकि न तो विभाग पूरी तरह से 1:30 का शिक्षक-छात्र अनुपात लागू कर रहा है और न ही 150 विद्यार्थियों की संख्या पर मुख्य शिक्षक का पद स्वीकृत कर रहा है
। वहीं नर्सरी कक्षा के बच्चों को भी छात्र संख्या में शामिल नहीं किया जा रहा है।
महासचिव दीपक गोस्वामी ने कहा कि वर्ष 1994 के बाद जितने भी स्कूल बने हैं, वे तथा राज्य के अन्य सभी कन्या प्राथमिक विद्यालय आज भी बिना मुखिया के चल रहे हैं। विभाग की नई व्यवस्था से प्राथमिक विद्यालयों से मुख्य शिक्षक के सभी पद समाप्त हो जाएंगे। यदि सरकार मुख्य शिक्षकों के पदों पर कैंची चलाती है तो प्राथमिक शिक्षकों को मिलने वाली एकमात्र पदोन्नति भी उनके लिए सपना बनकर रह जाएगी। उन्होंने बताया कि विभाग ने रैशनेलाईजेशन नीति में एक से तीस छात्रों पर एक अध्यापक, 31 से 60 पर दो, 61 से 90 पर तीन, 91 से 120 पर चार व 121 से 200 तक पांच शिक्षकों का प्रावधान कर रहा है तथा 200 छात्रों के बाद हर 40 छात्रों पर एक शिक्षक उपलब्ध करवाने की योजना बना रहा है। जबकि शिक्षा का अधिकार कानून में प्रत्येक 30 छात्रों पर एक प्राथमिक शिक्षक व 150 छात्रों पर एक अतिरिक्त मुख्य शिक्षक का पद होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षक संघ इस रैशनेलाईजेशन नीति का डट कर विरोध करेगा व जल्द ही प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में आंदोलन की रूपरेखा घोषित करेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री से अपील की कि इस रैशनेलाईजेशन नीति को तुरंत प्रभाव से वापिस लिया जाए।

3 Tier new rules

हरियाणा शिक्षा विभाग ने दो साल तक शिक्षकों के विरोध के चलते जिस थ्री टियर व्यवस्था को ठण्डे बस्ते में डाल रखा था, अब नए सत्र से उसे मूर्त रूप देने की तैयारी कर ली गयी है। रेशनलाइजेशन की प्रक्रिया के चलते अब लगभग विभाग की योजना लगभग साफ़ तौर पर देखी और समझी जा सकती है। थ्री टियर की इस नयी व्यवस्था के तहत कक्षा एक से आठ तक जेबीटी और मास्टर पढ़ाएंगे तथा कक्षा नौ से बारह तक लेक्चरर को पढ़ानी होगी। थ्री टियर व्यवस्था की नींव वैसे तो दो साल पहले ही रखी जा चुकी थी लेकिन लेक्चरर वर्ग के कड़े विरोध के कारण विभाग ने इसे अभी तक टाल रखा था। परन्तु अब जिस प्रकार से रेशनलाइजेशन की प्रक्रिया पूरे जोर शोर से चल रही है, उसे देख कर अगले सत्र से थ्री टियर लागू होने की सम्भावना को नकारा नहीं जा सकता। नयी व्यवस्था के तहत प्रदेश के सभी हाई स्कूलों में हिंदी, अंग्रेजी, रसायन शास्त्र, भौतिकी, गणित, संस्कृत/ फाइन आर्ट्स लेक्चरर के छः नए पद सृजित होंगे। 40 पीरियड तक एक प्रवक्ता तथा 41 या उससे अधिक पीरियड होने पर दो प्रवक्ता के पद बनेंगे। उधर रेशनलाइजेशन का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है।रेशनलाइजेशन के नए नियम: नए नियमों के अनुसार अब पहला सेक्शन 60 बच्चों तक का होगा, दूसरा सेक्शन 61-120 बच्चे होने पर बनाया जायेगा। तीसरा सेक्शन 121 पर, चौथा 161 पर, पांचवां सेक्शन 201 बच्चों पर और इसी प्रकार आगे प्रति 40 बच्चों पर एक सेक्शन का प्रावधान किया गया है। इसी प्रकार एक प्रवक्ता रोज अधिकतम 6 पीरियड और सप्ताह में 36 पीरियड पढ़ायेगा। प्रवक्ता का दूसरा पद 40 से ज्यादा पीरियड होने पर बनाया जायेगा, 80 से ज्यादा पीरियड पर तीसरा पद बनेगा।बहरहाल, कुछ भी हो, विभाग अगले सत्र से हर हाल में थ्री टियर सिस्टम लागू करने के मूड में है। हो सकता है बहुत जल्द हरियाणा के सरकारी स्कूलों में काफी कुछ बदला बदला नजर आये।

CTET 2012 Application Status

LTC kise milege-RTI


Primary Teachers ko English Training

पहले टीचरों को अंग्रेजी सिखाएंगे फिर छात्रों को
सरकारी प्राइमरी स्कूलों में नई कवायद
कंचन गुप्ता, गुडग़ांव

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली से पांचवीं कक्षा तक के छात्रों की अंग्रेजी सीखने के स्थिति को मजबूत बनाने के लिए एक नई कवायद शुरू की गई है। इसके तहत पहले अंग्रेजी सीखने और पढ़ाने को लेकर कई बिंदुओं पर सर्वे होगा। सर्वे के हासिल होने वाले नतीजों के आधार अंग्रेजी पढ़ाने की नए तरीकों को अपनाया जाएगा। इसके लिए प्राइमरी के अध्यापकों को भी विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

शिक्षा निदेशालय के पायलट प्रोजेक्ट के तहत गुडग़ांव स्थित स्टेट काउंसिल फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीईआरटी) का भाषा विभाग 'लर्निंग एंड टीचिंग ऑफ इंग्लिश' विषय पर सर्वे करेगा। इस सर्वे से जो निष्कर्ष आएगा उसी के आधार पर शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। पहले कदम में अंग्रेसी को लेकर स्कूलों में समस्या की वजह और जड़ को समझा जाएगा। इसके बाद अगले स्तर में अध्यापकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। तीसरे चरण में इस कवायद के बाद मिलने वाले नतीजों की समीक्षा होगी। आखिरी चरण में इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

एक नंवबर से शुरू होगा सर्वे: सर्वे एक नवंबर से शुरू किया जाएगा। सर्वे में 10 जिलों को शामिल किया जाएगा। प्रोजेक्ट का बजट तीन लाख रुपए है। 28 फरवरी तक सर्वे के कार्य को पूरा करके रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर मार्च माह से शिक्षकों को प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया को शुरू होगी।

एससीईआरटी के भाषा विभाग के इंचार्ज सुरेंद्र सिंधु ने बताया कि सर्वे कराने का उद्देश्य प्रदेश में प्राथमिक स्तर पर छात्रों के अंग्रेजी के ज्ञान को बढ़ाना है। सर्वे में देखा जाएगा कि सिलेबस के मुताबिक छात्रों को अंग्रेजी का कितना ज्ञान है। उसके मुताबिक ही शिक्षकों को प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया तैयार की जाएगी।

॥प्रदेश के प्राइमरी के छात्रों की अंग्रेजी के स्तर को सुधारने के लिए सर्वे किया जा रहा है। सर्वे के आधार पर ही शिक्षकों के प्रशिक्षण को शुरू किया जाएगा। सर्वे का उद्देश्य खामियों को ढूंढ कर उन्हें दूर करना व छात्रों के लर्निंग स्तर को मजबूत बनाना है।
स्नेहलता, निदेशक, एससीईआरटी, गुडग़ांव

इन जिलों में होगा सर्वे
प्रदेश के दस जिलों गुडग़ांव, मेवात, महेंद्रगढ़, सोनीपत, हिसार, रेवाड़ी, जींद, कुरुक्षेत्र, कैथल, झज्जर के सरकारी स्कूलों में किया जाएगा। इसके लिए 9 अक्टूबर को इन जिलों के जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी और उप-जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों की बैठक एससीईआरटी में होगी। इसमें विशेषज्ञ सर्वे की प्रक्रिया पर चर्चा करेंगे।

New 3 Tier rules


PTI bharti next date 9 Oct.

पी. टी .आई भर्ती को रद्द करने के फैसले के खिलाफ आज (4/10 )हाई कोर्ट की डिविजन बेंच में सुनवाई हुई, डिविजन बेंच ने स्टे देने से इंकार करते हुए कहा की डिविजन बेंच 9 अक्टूबर को मामले का फैसला ही कर देगी और तब तक के लिए पी. टी .आई भर्ती रद्द करने करने के फैसले पर अंतरिम रोक रहेगी. अब मामले की सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी

Wednesday, September 5, 2012

JNV-6th Class addmission:

Jawahar Navodaya Vidyalaya:
6th Class addmission:
Last Date:1 Oct.
Exam:10Feb
Age: 1.5.2ooo to 3o-4-2oo4
www.navodaya.nic.in

Teacher`s Day Story

Sarvepalli Radhakrishnan was born in a poor Telugu Brahmin family at Tiruttani India, now in Thiruvallur District, Tamil Nadu, 84 km to the northwest of Madras (now Chennai). [3] His father's name was Sarvepalli Veeraswami[3] and his mother's name was Sitamma.[3] His early years were spent in Tiruttani and Tirupati. His father was a subordinate revenue official in the service of a local zamindar (landlord). His primary education was at Primary Board High School at Tiruttani. In 1896 he moved to the Hermansburg Evangelical Lutheral Mission School in Tirupati.[4]
Radhakrishnan was awarded scholarships throughout his academic life. He joined Voorhees College in Vellore but switched to the Madras Christian College at the age of 17. He graduated from there in 1906 with a Master's degree in Philosophy, being one of its most distinguished alumni.[5] Radhakrishnan wrote his thesis for the M.A. degree on "The Ethics of the Vedanta and its Metaphysical Presuppositions".[6] He was afraid that this M.A. thesis would offend his philosophy professor, Dr. Alfred George Hogg. Instead, Hogg commended Radhakrishnan on having done most excellent work.[citation needed] Radhakrishnan's M.A. thesis was published when he was only 20.
Radhakrishnan studied philosophy by chance rather than choice. Being a financially constrained student at the time, when a cousin, after graduating from the same college, passed on his textbooks in philosophy to Radhakrishnan, it automatically decided his academic course.[7][8] Later on he felt deep interest in his subject and wrote many acclaimed works on philosophy, both Eastern and Western.
[edit]Marriage
Radhakrishnan was married to Sivakamu,[9] a distant cousin, at the age of 16.[10] As per tradition the marriage was arranged by the family. The couple had five daughters and a son, Sarvepalli Gopal. Sarvepalli Gopal went on to a notable career as a historian. Sivakamu died in 1956. They were married for over 51 years.[11]
[edit]Career



Sarvepalli Radhakrishnan drawn by Bujjai and signed by Radhakrishnan in Telugu as "Radhakrishnaiah".
In April 1909,Sarvepalli Radhakrishnan was appointed to the Department of Philosophy at the Madras Presidency College. Thereafter, in 1918, Radhakrishnan was selected as Professor of Philosophy by the University of Mysore. By that time he had written many articles for journals of repute like The Quest, Journal of Philosophy and the International Journal of Ethics. He also completed his first book, The Philosophy of Rabindranath Tagore. He believed Tagore's philosophy to be the "genuine manifestation of the Indian spirit". Radhakrishnan's second book, The Reign of Religion in Contemporary Philosophy was published in 1920.
In 1921 he was appointed as a professor in philosophy to occupy the King George V Chair of Mental and Moral Science at the University of Calcutta. Radhakrishnan represented the University of Calcutta at the Congress of the Universities of the British Empire in June 1926 and the International Congress of Philosophy at Harvard University in September 1926. Another important academic event during this period was the invitation to deliver the Hibbert Lecture on the ideals of life which he delivered at Harris Manchester College, Oxford in 1929 and which was subsequently published in book form as An Idealist View of Life.
In 1929 Radhakrishnan was invited to take the post vacated by Principal J. Estlin Carpenter at Harris Manchester College. This gave him the opportunity to lecture to the students of the University of Oxford on Comparative Religion. For his services to education he was knighted by George V in the June 1931 Birthday Honours,[12] and formally invested with his honour by the Governor-General of India, the Earl of Willingdon, in April 1932.[13] However, he ceased to use the title after Indian independence,[14]:9 preferring instead his academic title of 'Doctor'.he was having a title called sir also .

He was the Vice-Chancellor of Andhra University from 1931 to 1936. In 1936 Radhakrishnan was named Spalding Professor of Eastern Religions and Ethics at the University of Oxford, and was elected a Fellow of All Souls College. In 1939 Pt. Madan Mohan Malaviya invited him to succeed him as the Vice-Chancellor of Banaras Hindu University (BHU).[15] He served as its Vice-Chancellor till January 1948.
When India became independent in 1947, Radhakrishnan represented India at UNESCO (1946–52) and was later Ambassador of India to the Soviet Union, from 1949 to 1952. He was also elected to the Constituent Assembly of India.
Radhakrishnan was elected as the third Vice President of India in 1952.[11] He was elected as the second President of India (1962–1967). When he became President, some of his students and friends requested him to allow them to celebrate his birthday, 5 September. He replied,
"Instead of celebrating my birthday, it would be my proud privilege if 5 September is observed as Teachers' Day."
His birthday has since been celebrated as Teachers' Day in India.[16]
Along with Ghanshyam Das Birla and some other social workers in the pre-independence era, Radhakrishnan formed the Krishnarpan Charity Trust